ब्रेस्ट कैंसर: क्या लौटती है पति-पत्नी के रिश्तों में गर्माहट, ट्रीटमेंट के बाद कैसे करें प्यार की नई शुरुआत

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  • Does The Warmth Return In The Relationship Between Husband And Wife, After The Treatment Of Breast Cancer? Know How To Make A New Beginning Of Love?

4 दिन पहलेलेखक: श्वेता कुमारी

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कैंसर के मरीजों की संख्या में दिन-ब-दिन इजाफा जारी है। भारत में महिलाओं में होने वाले कैंसर के कुल मामलों में से 27 फीसदी केस ब्रेस्ट कैंसर के होते हैं। इसका महिलाओं के तन, मन और धन के साथ ही रिश्तों पर भी बुरा असर पड़ता है। अमेरिकन रिसर्चर व सेक्स थेरेपिस्ट लौरा बर्मन की माने तो ब्रेस्ट कैंसर का पता चलते ही महिलाओं के सेक्सुअल रिलेशिनशिप न के बराबर रह जाते हैं।

लौरा बर्मन ने अपना अनुभव साझा करते हुए बाताया, जब मेरी कैंसर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तब मैं सदमे में आ गई थी। जिसका असर ये हुआ कि मेरे मन में ट्रीटमेंट के दौरान एक बार भी सेक्स का ख्याल नहीं आया। उस दौरान मुझे बस केयर और सपोर्ट की जरूरत महसूस होती थी। ट्रीटमेंट के बाद मुझे लंबा वक्त लगा अपनी सेक्सुअल लाइफ को ट्रैक पर लाने में। बर्मन कहती हैं कि इसमें आपको देर लग सकती है, लेकिन आप निश्चित होकर अपनी इंटिमेट लाइफ की ओर वापस लौट सकती हैं।

नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) के मुताबिक भारत में साल 2020 में ब्रेस्ट कैंसर के 13.9 लाख केस सामने आए, जो 2025 तक 15.7 लाख तक हो सकते हैं। ये बताता है कि हर साल ब्रेस्ट कैंसर के पेशेंट तेजी से बढ़ रहे हैं। बढ़ते मामलों के बीच इस सवाल का जवाब भी जरूरी है कि इस बीमारी से उबरने के बाद पति-पत्नी का रिश्ता कैसा होता है और उसे कैसे सुधार सकते हैं।

जब किसी महिला को पता चलता है कि उसे ब्रेस्ट कैंसर है, तो सहानुभूति देने वालों की भीड़ जुट जाती है। दवा और ट्रीटमेंट के बाद, जब वे रिकवर कर लेती हैं, तो एक वक्त ऐसा भी आता है कि लोग उनसे बीती जिंदगी में दोबारा से ढल जाने की उम्मीद करते हैं। बीतते समय के साथ परिवार और परिचितों की बीमार के लिए संवेदनाएं कम होती चली जाती है। शादी-शुदा जिंदगी में इसके असर पर भास्कर वुमन ने खास बातचीत की है नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च के पूर्व डायरेक्टर और सेंटर फॉर हेल्थ इनोवेशन एंड पॉलिसी के फाउंडर डॉ. रवि मेहरोत्रा।

ब्रेस्ट कैंसर के मामलों अगर फर्स्ट या सेकंड स्टेज में पता चल जाने पर ब्रेस्ट हटाने की जरुरत नहीं पड़ती। यही अगर तीसरे या चौथे स्टेज तक पहुंच जाए, तो ब्रेस्ट रिमूव करना जरूरी हो जाता है। इससे न सिर्फ महिलाएं मानसिक तौर पर परेशान होती हैं, बल्कि शरीर में हुए बदलाव भी उन्हें असहज करता है। डॉ. मेहरोत्रा बताते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर के बाद महिलाओं में जो बदलाव आते हैं, उसका असर उनके शादी-शुदा जिंदगी में पड़ता है।

सेंटर फॉर हेल्थ इनोवेशन एंड पॉलिसी के फाउंडर डॉ. रवि मेहरोत्रा

सेंटर फॉर हेल्थ इनोवेशन एंड पॉलिसी के फाउंडर डॉ. रवि मेहरोत्रा

क्या होता है ब्रेस्ट कैंसर से उबरने के बाद?

  • फिजिकली कनेक्ट होने की इच्छा कम हो जाती है।
  • ट्रीटमेंट के बाद महिलाओं में वेजाइनल लुब्रीकेशन कम हो जाता है।
  • रिश्ते बनाने के लिए पार्टनर की तरफ से होने वाली जोर जबरदस्ती उन्हें दर्द पहुंचाती है।
  • ब्रेस्ट रिमूव करने के बाद उस जगह दर्द की शिकायत बनी रहती है।
  • ब्रेस्ट हटाने के बाद कई बार हाथ के ऊपरी हिस्से में लिक्विड भर जाता है, जिसे लिम्फेडेमा कहते हैं।

मैरिड लाइफ पर होता है कैसा असर?

ब्रेस्ट कैंसर में साथ देने वाले पार्टनर एक वक्त के बाद खुद की जरूरतों पर भी ध्यान देने लगते हैं। उनमें अपनी इंटिमेट लाइफ आगे बढ़ाने की इच्छा जगती है, जिसे लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर तकरार होती है।

  • उबरने के बाद पीड़ित का इमोशनल एंगल बरकरार रहता है, लेकिन पार्टनर कई बार उसे नहीं समझ पाता है।
  • हार्मोनल ट्रीटमेंट की वजह से अर्ली मेनोपॉज देखी जाती है, जिससे रिश्ते बनाने की इच्छा खत्म होने लगती है।
  • ट्रीटमेंट से उबरने के बाद कई महिलाओं में डिप्रेशन होता है, जिसकी वजह से सेक्स की इच्छा कम हो जाती है।

कैसे करें प्यार की नई शुरुआत?

डॉ. मेहरोत्रा बताते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर से उबरी महिलाएं नार्मल जिंदगी शुरू करें, इसके लिए उन्हें परिवार और खास-तौर पर पार्टनर के सपोर्ट की जरूरत होती है। इसलिए यहां रिश्ते को पुराने ढर्रे पर न चलाकर एक नई शुरुआत करनी चाहिए। अगर आप अपने इंटिमेट रिश्ते को दोबारा शुरू करने को तैयार हैं, तो इन विकल्पों को अपना सकते हैं।

  • इंटीमेसी के लिए कपल तकिए का इस्तेमाल करें जिससे दर्द या परेशानी न हो।
  • वेजाइनल लुब्रीकेशन के लिए ऑयल या किसी और लुब्रीकेंट का इस्तेमाल सकते हैं।
  • अपने सेक्सुअल लाइफ को लेकर डॉक्टर से खुलकर बात करें और सुझाव लें।
  • पार्टनर्स एक दूसरे को क्वालिटी टाइम दें और समझने की कोशिश करें।
  • ट्रीटमेंट खत्म होने के बाद दवाओं की वजह से लोग चिढ़चिढ़े हो जाते हैं, उन्हें इमोशनल सपोर्ट दें।
  • पति-पत्नी का रिश्ता बेहद खास होता है. दोनों बुरे वक्त में साथ रहे हैं, तो एक दूसरे में अब अच्छे वक्त आने की उम्मीद जगाएं।

ये एक ऐसी स्टेज है, जिसे लेकर कुछ तय नहीं है कि महिलाएं बीमारी से उबरने के बाद कितने समय में नार्मल जिंदगी जीना शुरू कर पाएंगी। कुछ महिलाएं 2-4 महीने में ही ठीक हो जाती हैं, तो कुछ साल भर का समय लेती हैं। वहीं कुछ मामले ऐसे भी देखे जाते हैं, जहां महिलाएं मानसिक तौर पर इससे कभी नहीं उबर पातीं। इसलिए उनका साथ दीजिए, उन्हें समझने की कोशिश कीजिए। ब्रेस्ट कैंसर से उबरी महिलाओं ने जिंदगी में कुछ ऐसा महसूस किया है, उस दर्द से गुजरी हैं, जिसकी तकलीफ को आप और हम सोच भी नहीं सकते।

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